1. एकलव्य पद्धति और संसदीय वयवस्था क्या है ?

अ) एकलव्य वह पद्धति है जो वर्षो की समझ के बाद की व्यक्ति के ज्ञानी होने में न वातावरण, न वंश, न शरीर, न जंगल, न पहाड़, न कला, न ही साधना और समाधी काम आती है। तत्पश्चात एक ऐसी विधि को विकशित करने का कार्य किया गया जो सर्वमान्य हो और सब जगह काम करे। व्यक्ति स्वयं के द्वारा स्वयं से प्रश्न करते हुए विशेष ज्ञान को विज्ञानं के रस्ते से लक्ष्य को पाने का प्रयाश करना है। इस विधि का नाम-करण एकलव्य के कार्य के कारन एकलव्य रखा गया।

ब) सामाजिक विज्ञानं समाज में बच्चो की उपयोगिता और पूरकता के लिए बनाया गया था परन्तु विषय के विस्तार और वर्तमान में अनर्थक और परिस्थितियों में बहुत भेद होने के कारण विषय अप्रासंगिक हो गया। स्कूल में संसदीय वयवस्था इन्ही कारणों को ख़त्म करने के लिए बच्चों द्वारा बच्चों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कराये जाने वाले कार्य है। इसमे हमने लोकतंत्र के चारो स्तंभों का इस्तेमाल किया है। (विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका का चुनाव प्रत्येक माह होता है।) चौथे स्तम्भ के रूप में परिणाम स्वयं मूल्यांकन के अधर पर 15 दिन में जीवन कौशल के रूप में किया जाता है।

2. Bully होने का प्रमुख कारण प्रत्येक दुसरे के साथ प्रतियोगीता है। (Survival to fittest या संघर्ष ही जीवन है जैसी बहुत सारी सिधांत शिक्षा और सामाजिक जीवन में गहराई से जगह बना चुके थे) प्रतियोगिता के कारण Bully होते है। जिसको हमने प्रत्येक बच्चे को पूरी तरह समझ कर Bully का आधार समाप्त कर दिया। तत्पश्चात हमने प्रत्येक बच्चे को अपनी उपयोगीता बनाते हुए प्रत्येक दुसरे की पूरकता के लिए कार्य और समाज में अपनी महत्ता सिद्ध करने के लिए प्रेरित किया जिससे Bully ही Buddy के रूप में काफी तेजी से उभरा।

3. a. विद्यार्थियों के संभावनाओं को पाने में शिक्षक और विद्यार्थी द्वारा उपयोगिता और पूरकता के आधार पर अधिकतम दूरियों को पाने का प्रयास किया गया ।

b. कुछ मिथक जैसे वातावरण , परिवार , स्थान आदि के प्रभाव को नकारते हुए विद्यार्थी के उपलब्धियों को पाने में शिक्षक को सहायक , प्रेरक और विश्लेषक के रूप में स्थापित किया ।

c. हमने बच्चो की शिक्षा में अनिवार्य रूप से स्वरोजगार पर (शोषण रहित ) की ओर विशेष प्रोत्साहित किया जिसके लिए विदेशी भाषा, आयुर्वेदिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, कंप्यूटर व अन्य कामो पर काफी तेजी से काम चल रहा है ।

d. हमने Self Competition, Group Reciprocal , Eklavya System, Subject का Fusion, इसके पश्चात Group Discussion और जीवन में habit और understanding पर विशेष जोर दिया ।

e. हमने समझकर सीखने और करने पर बल दिया । न की सीखकर करने और करके सीखने पर ।

f. हमने शारीरिक आयु को, समझने और सीखने की सीमा से परे माना । इसलिए मुनि स्कूल में Primary Level पर Reasoning एंड Logic शुरू किया गया है ।

4.हम बच्चो को सम्बन्धो की पहचान, मुल्को की समझ [विश्वास, सम्मान, स्नेह, प्रेम, श्रद्धा ] और उनका निर्वाह समझाते हैं । इसको Give and Take Chart और PPMS [ Primary Parent Monitoring System ] द्वारा जांचा जाता है । प्रत्येक बच्चे अपने कार्यो को जांचने की विधि दी गई है जिसमे वह प्रकृति के संतुलन को बनाये रखने में सहायक होती है ।

समझने की विधि

१. निरीक्षण – स्वयं में जांचना
२. परिक्षण – दुसरो में
३. सर्वलक्षण – सब में (सहज स्वीकार्य हो )

जीने के आधार

१. स्वयं में तृप्ति
२. उभय तृप्ति
३. परिवार में समृधि
४. प्रकृति में संतुलन
५. सर्वमान्य उदहारण दे सके

5. हमारे विद्यालय का हर विद्यार्थी यह जानता है की सभी मानव का लक्ष्य समान है [ समाधान, समृधि, अभय और सह अस्तित्व ]

जाति, धर्म और अमीर गरीब, धार्मिक प्रतीक चिन्हो से किसी व्यक्ति विशेष की कोई विशेष उपलब्धि नहीं देखी गई । क्योंकि ज्ञान और सम्मान किसी की बपौती नहीं थी और न है । प्रत्येक व्यक्ति मेरे समझने व आगे बढ़ने में सहायक है जिससे बच्चे धार्मिक समुदायों के बजाये मानवीयता आधार पर व्यव्हार करते है ।

हमने विद्यालय में इस बात पर बल दिया प्रत्येक वस्तु और व्यक्ति मेरे समझदार और समृध होने में सहायक है । इसको हमने GRS (Group Responsiblity System ) के द्वारा बच्चो में स्थापित किया । GRS में प्रत्येक बच्चा दूसरे का उपयोगी एवं पूरक बनकर उसके प्रदर्शन के लिए जिम्मेवार बनता है । हमने वैचारिक मतभेद को व्यव्हार का आधार बनने से रोका है ।

6.HADS एक ऐसी पद्धति है जिसमे बच्चे अपनी handwriting, Word Meaning, Hindi / English version पर काम करते हैं । Chapter Reading के समय बच्चे जिन शब्दों को नहीं समझते हैं उन्हें रेखांकित करते हैं जिसके बाद वह उसका अर्थ ढूंढ कर लिखते हैं । उसके बाद paragraph का हिंदी में अनुवाद करते हैं और अपने अनुवाद का ही english में अनुवाद करते हैं । प्रत्येक शब्द कुछ कहता है और उसमे कुछ भाव होता है । Hindi / English के अनुवाद में बच्चा दोनों के बीच के अंतराल को समझ जाता है और औपचारिक भाषा के इस्तेमाल पर उसका अधिकार बन जाता है । और अब चाहे उसे अनौपचारिक कर सकता है ।

७. स्कूल दो तरीके से काम करता है जीने के लिए समझ और अकादमिक समझ । जीने के लिए समझ के लिए जीवन विद्या का रिफरेन्स लिया जाता है और अकादमिक समझ के लिए लर्निंग एंड टीचिंग की यूनिक methodology discover की है और उसे सफलता पूर्वक लागू किया जाता है । हमने शैक्षिक मिथक तोडा है । जैसे हमने समझने और आयु के सम्बन्ध को समार कर सफलता पूर्वक छोटी कक्षाओं में भी बड़ी कक्षा के विषय पढ़ाये है ।

विद्यार्थियों के अच्छी performance को ध्यान में रखते हुए अगली कक्षाओं में jump करा दिया जाता है ।

वर्तमान शिक्षा में ;ज्ञान को टुकड़ो टुकड़ो में बाँट कर लम्बे अंतराल के बाद उसमे जुड़ाव दिखाना और काफी समय बाद बीत जाने के बाद उसकी उपयोगिता और पूरकता का, अधिकतर बच्चे द्वारा ही स्वय देखे जाना निष्ठुर और निर्गम पद्धतियों ने बच्चे का बचपन तो छिना ही और [ ज्ञान बड़ा या शरीर बड़ा में शरीर को ही सही सिद्ध कर दिया ] वर्तमान में अक्सर यह देखा जा रहा है कि बच्चे छोटी उम्र में ही अपनी प्रतिभा स्थापित करके कही ये संकेत तो नहीं है की सभी बच्चे काबिल थे और हमारी शिक्षा उनकी काबिलियत को साबित नहीं कर पा रहे थे इसलिए कुछ बच्चे अपनी प्रतिभा को विरोध करके कर साबित कर रहे थे ।

8. हमने विद्यालओं में पुस्तको को हटकर tablets लगाये है जिसमे 12th तक की सभी किताबे e-book के रूप में उपलब्ध हैं । अब बच्चो को हैवी बैग के बदले केवल TAB लाना होता है । Tablet लगाने से books का खर्च खत्म हुआ, Computer अलग से पढ़ाने की आवश्यकता खत्म हुई और बच्चे technology friendly हुए ।

9. Action speaks and proves lauder than word.
विभिन्न researches में हमने पाया की दुसरो को पढ़ाने से हम स्वयं ज्यादा सीखते हैं । बच्चे Group Reciprocal System, Center Work और Group Discussion आदि में अपने buddy को, घर में पेरेंट्स और पड़ोसियों को पढ़ाते हैं । Monday और Thursday को स्कूल में Foreign Language पढ़ाते है ।