नई दिल्ली(संवाददाता)- छात्र-शिक्षक व अभिभावकों के बीच सेतू का काम करने वाली स्कूलों की पीटीएम का अपना खास महत्व है। जिसमें शामिल हो कर अभिभवक अपने बच्चों के अध्यापकों से मिलतें हैं और बच्चों के शैक्षिक स्तर में हुए सुधारों व बच्चों द्वारा घरों में बरती जाने वाली अच्छी आदतों पर चर्चा करते हैं।

मुनि स्कूल में छुट्टियों बाद आयोजित हुई पहली PTM में अभिभवकों ने काफी संख्या में शिरकत की। अभिभवकों ने माना कि छुट्टियों के बाद पहली PTM काफी खास रही। क्योंकि छुट्टियों की मस्ती के बाद बच्चों का पढ़ाई में जल्दी मन नहीं लगता, लेकिन पीटीएम में आने के बाद अध्यापकों ने छात्रों को समझाया वहीं अभिभावकों से भी अपील की गई कि वो बच्चों को पीटने, डांटने की बजय प्यार से समझाने का प्रयास करें। यदि प्यार से नहीं समझाया जाएगा तो बच्चा जिद्दी हो जएगा और उस में माता-पिता के प्रति कई प्रकार की नकारत्म सोच बनने लगेगी।

नया दाखिला लेने वाल छात्रों के अभिभावकों ने पीटीएम में काफी रूची दिखाई। स्कूल की शिक्षण व्यवस्था व अन्य गतिवधियों की सराहना करते हुए कहकि मुनि स्कूल अन्य स्कूलों से काफी अलग है। स्कूल के संस्थापक डॉ. अशोक ठाकुर की दूरगामी सोच का परिणाम है कि एक ही परिसर में विभिन्न देशों की भाषा तकनीक अधारित टेबलेट शिक्षा, मानवीय मूल्यों के साथ-साथ राष्ट्र व समाजिक दायित्वों के बारे में आरंभ से छात्रों को सिखाया जाता है। ये सब अन्य स्कूलों में नहीं होता।

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