छात्रों को प्रेरित करने हेतु मुनि स्कूल ने शुरू किया “श्रवण” अवार्ड

मुनि इंटरनेशनल स्कूल के पहले “श्रवण” अवार्ड से सम्मानित हुए अनिल अहलावत

नई दिल्ली – भारतीय समाज में माता-पिता व गुरूजनों को सदैव आदर व सत्कार दिया जाता रहा है। लेकिन बीते कुछ दशकों से भारतीय समाज में पाश्चात्य संस्कृति का अंधाधुंध अनुकरण होने लगा। जिसके परिणाम स्वरूप युवाओं में नैतिक मूल्यों का पतन होने के साथ-साथ अपने गुरूजनों व माता-पिता के प्रति आदर भाव भी कम होने लगा।
युवाओं में गिरते नैतिक मूल्यों तथा माता-पिता व गुरूजनों के प्रति कम होते आदर सम्मान को बढ़ाने और युवाओं में संस्कारों का बीजारोपण करने के उद्देश्य से मातृ-पितृ पूजन दिवस व अभिभावक अभिनंदन समारोह जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

स्कूल संस्थापक डॉ. अशोक कुमार ठाकुर ने स्कूल पहुंचे सभी अभिभावकों को धन्यवाद करते हुए कहा कि आज समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और कम होते संस्कारों को मजबूत करने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों की महती आवश्यकता है। समाज में श्रवण व शहीद भगत सिंह जैसे बच्चे बनाना कोई बड़ी बात नहीं है। इसके लिए माता-पिता को भी बच्चों के लिए आदर्श बनना होगा।

इस दौरान श्री ठाकुर ने घोषणा की कि इस वर्ष से मुनि स्कूल अपने छात्रों के लिए “श्रवण” अवार्ड की शुरूआत कर रहा है। यह अवार्ड प्रत्येक वर्ष ऐसे छात्रों को दिया जाएगा जो समाज में संस्कारों को बचाए, माता-पिता की सेवा करे, गुरूजनों की आज्ञा का पालन करेगा। इस बार का पहला “श्रवण” अवार्ड अनिल अहलावत को देकर सम्मानित किया गया। क्योंकि श्री अहलावत ने अपने माता-पिता की सेवा करते हुए समाज में एक उदहारण प्रस्तुत किया है, जिससे अन्य छात्रों व लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए।

मुनि स्कूल में आयोजित अभिभावक अभिनंदन समारोह के दौरान सैंकड़ों छात्र अपने माता-पिता के साथ स्कूल पहुंचे। इसके बाद माता-पिता को तिलक लगा कर फूलमाला पहनाई, आरती उतारी, मिठाई खिलाई और पांव छुए आशीर्वाद लिया। इस दौरान बहुत से माता-पिता भावुक हुए और आँखें भी नम हुई, वहीं इस मौके पर छात्र भी भावुक हुए बिना नहीं रह पाए। छात्रों ने संकल्प किया कि वो अपने-माता पिता व गुरूजनों का कभी अनादर नहीं करेंगे, आ-जीवन उनकी सेवा करेंगे।

स्कूल में आयोजित अभिभावक अभिनंदन समारोह के दौरान स्कूली छात्रों ने एक बटा दो, दो बटे चार, छोटी-छोटी बातों पे बंट गया संसार, लेकिन नहीं बटा है, नहीं बटेगा ममी-डेडी का प्यार —-, पाप-मेरे-पापा, मेरी मम्मी जैसी कोई ओर नहीं, ओम् साईं राम — जैसे गानों पर स्कूल के नन्हें मुन्ने बच्चों ने बहुत से सांकृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति दी। इसके अलावा छात्रओं ने समाजिक परिस्थितियों को दर्शने वाला मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार का नाटक तथा देश में हो रहे सामाजित पतन को दर्शने वाले शहीद भगत सिंह के नाटक को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी और दर्शकों व युवाओं को सोचने पर मजबूर किया। वहीं स्कूल में पढाई जाने वाली सात देशों की भाषा को सीखने वाले छात्रों ने विदेशी भाषाओं जैसे जापानी, अरबी, स्पेनिश, फ्रैंच व संस्कृत भाषाओं के गानों की मनभावन प्रस्तुति दे कर सब को अचंभित किया।

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