Good Touch-Bad Touch के साथ जरूरी है बच्चों को Right-Touch की जानकारी देना : डॉ. अशोक ठाकुर

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माता-पिता व अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं, बच्चों की सुरक्षा के लिए तमाम उपाय भी करते हैं, फिर भी छोटे-छोटे मासूम बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार, बलात्कार जैसी घटनाएं हो जाती हैं, जो हम सब के लिए चिंता का विषय है।

समाज में इस प्रकार की घटनाएं ना हों इसके बारे में छोटे बच्चों को जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों से Good Touch – Bad Touch की जानकारी देने के लिए जो मुहिम स्कूलों व विभिन्न संस्थानों में शुरू की गई है वह जरूरी है। लेकिन बच्चों को Good Touch – Bad Touch के बारे में जो बताया जा रहा है,  वह काफी नहीं है।

क्योंकि यहां बच्चों को समझाया जाता है कि यदि कोई व्यक्ति आपको गलत इरादे से छू रहा हो तो उसे कैसे समझे। अनजान लोगों से दूर रहें। अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में जानकारी के साथ उदाहरण भी दिए जाते हैं।

इन तमाम बातों को लेकर न्यूज4सिटि संवाददाता राजेश शर्मा ने मुनि इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक डॉ. अशोक कुमार ठाकुर से विशेष साक्षात्कार में जाना कि इन दिनों Social media पर तेजी से वायरल हो रही वीडियो में छोटे बच्चों को Good Touch – Bad Touch के बारे में जो समझाया जा रहा है वो कितना सही है। क्या स्वीमिंग कॉस्ट्यूम में छुपने वाले अंगों को छूना ही Bad Touch होता है, क्या छोटे बच्चों को Good Touch – Bad Touch को समझने के लिए ये उदहारण काफी हैं।

इस बारे में डॉ. अशोक ठाकुर का मानना है कि स्वीमिंग कॉस्ट्यूम में छुपने वाले अंगों को छूना तो Bad Touch बताया जा रहा है, लेकिन हमें इसके अलावा देश, समय व परिस्थितियों के अनुसार किसी को छूने, स्पर्श करने या उसकी भाव-भंगिमाओं पर भी ध्यान देना भी जरूरी है। क्योंकि उचित परिस्थति के बिना किए जाने वाले हर वह टच और इशारा Bad Touch है जिनको हमारे समाज व संस्कृती में स्वीकार नहीं किया जाता हो। इन सबको Bad Touch की श्रेणी में शामिल किया जाना जरूरी हैं। इन सब को समझने के लिए भी बच्चों व अभिभावकों में समझ पैदा करनी होगी। इसे हम Right touch के नाम से भी समझा सकते हैं।

जो टच समाज व स्थिति को स्वीकार्य न हो उसे Bad Touch माना जाए और Right touch वह टच है जो समाज व स्थिति को स्वीकार्य हो।

मान लें कोई परिचित व्यक्ति भवनाओं में आकर सङक किनारे या किसी महफिल में अपनी बहन के गालों छूने लगे या जोर-जोर से गले मिलने लगे, छोटे बच्चों बुरे तरीके के से बाहों में भरे, चूमने लगे या गालों को बार-बार टच करेंगे तो लोग उसे गलत अर्थ में लेंगे और उस बहन व बच्चे को भी बुरा लगेगा। बच्चों को बुरा लगे वो टच कभी न करें। बच्चों व अभिभावकों को इसके बारे में भी जागरूक करना जरूरी होना चाहिए।

प्र. क्या अनजान लोग ही छोटे बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार की घटनाओं को अंजाम देते हैं ?

– जी नहीं, यह केवल धारणा बन चुकि है, कि अनजान लोग बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। राष्ट्रीय क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरों के अनुसार इस प्रकार की घटनाओं में 60 से 72 प्रतिशत केसों में तो पारिवारिक लोग, जानने वाले, पङोसी ही शामिल पाए जाते हैं। इसके लिए अकेले अनजान लोगों को यह दोष देना पूर्णत्य सही नहीं है। किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए अभिभावकों को आरंभ से ही बच्चों को समझाना चाहिए कि वो विश्वास सब का करें लेकिन उचित दुरी बनाकर रखें।

प्र. भारत जैसा देश जहां परिवार व संबंधों में जीना ही परंपरा रही है, वहां भी आज बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं के होने के क्या कारण मानते हैं ?

– जी ये सही है, कि हमारे देश में आदि काल से ही संबंधों को पवित्रता के साथ निभाया और जीया जाता रहा है। लेकिन इन दिनों यहां भी बच्चों के साथ होने वाली यौन दुर्व्यवहार घटनाओं में इजाफा होने के पीछे मुख्यतः संयुक्त परिवारों का टूट कर एकल परिवारों का बढ़ना, लाभोउन्माद, अति भोगवाद की इच्छा, लोगों में बढ़ता मानसिक दबाव जैसी प्रवृतियों के बढ़ने के कारण आज भारत जैसे अध्यात्मिक विश्व गुरू देश में बालयौन दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

प्र. यौन दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं को रोकने में स्कूलों व माता-पिता की क्या भूमिका हो सकती है।

– बच्चों के साथ होने वाली यौन दुर्व्यवहार घटनाओं को रोकने में स्कूल व माता-पिता अहम भूमिका निभा सकते हैं, स्कूल व अभिभावकों चाहिए कि वो बच्चों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों की गतिविधियों पर नज़र रखें, किसी अन्य के भरोसे पर बच्चों उनके साथ न भेजें, बच्चे के उदास या चिड़चिड़ा होने पर प्यार से पूछे और बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करें कि जब भी कोई उनके साथ गलत हरकत करे तो उसका विरोध करें और उसी दिन अभिभावकों व अध्यापकों को बताने के लिए जागरूक करें तो हम बच्चों के साथ होने वाली यौन दुर्व्यवहारों की घटनाओं को कम करने में सफल हो सकेंगे।

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