शिक्षा के साथ संस्कार भी देती है एकलव्य एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी

जरूरतमंदों को “एक मुट्ठी अनाज” और रोगियों के लिए एक्यूप्रेसर की मुहीम से जुङे हैं मुनि इंटरनेशनल स्कूल के छात्र

नई दिल्ली – स्कूली छात्रों को शिक्षा के साथ समाजिक संस्कार सिखाने के लिए एकलव्य एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा विशेष कार्यक्रम चलाए जाते हैं। ताकि छात्र अपने आचरण से सामाजिक जीवन को बेहतर तरीके से जीना सीखें। समाज में दूसरे जीवों की महत्वता समझें उनके दुःख-दर्द को जाने और समाज की व्यवस्था में भागीदार बनें।
क्योंकि व्यक्ति के जन्म से उसकी उन्नती तक के सफर मे समाज व प्रकृति का असीम योगदान रहता है। मनुष्य समाज व प्रकृति से जीवन प्रयंत बहुत कछ लेता रहता है, इस लिए मनुष्य का नैतिक दायित्व बनता है कि वो भी समाज व प्रकृति को कुछ देना सीखे, समाज में जरूरतमंदों के काम आए, समाज के प्रति अपना व्यवहार सही रखे प्रकृति संसाधनों का संरक्षण करें।
इन तमाम पहलूओं को ध्यान में रखते हुए एकलव्य एजुकेशन सोसाइटी के सचिव डॉ. अशोक कुमार ठाकुर की प्रेरणा से स्कूल में समाजिक सरोकार के लिए कई प्रकार के समाजिक व जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। जिनका उद्देश्य देश के भावी कर्णधारों में छात्र जीवन से ही सु-संस्कारों का बीजारोपण करना है।
मुनि इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा शर्मा ने बताया कि स्कूल में बीते तीन वर्ष से “एक मुट्ठी अनाज” की प्रक्रिया शुरू की गई जिसका मकसद छात्रों को समाज के उन जरूतमंद लोगों के प्रति बेहतर सोच विकसित करना था। इस मुहिम के तहत मुनि इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों को प्रत्येक माह के अंतिम दिन दिल्ली के वृद्ध आश्रम में भेजा जाता है, ताकि छात्र उन लोगों के दुःख-दर्द को संजीदगी से समझ सकें जिनको सभय समाज के लोगों द्वारा एस समय के बाद अपने हाल पर दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोङ दिया जाता हैं।

लेकिन हमें समझना चाहिए की मनुष्य प्रकृति की अनमोल रचना, इसके अंदर जो परमात्मा रूपी आत्मा है वो हर सुख-दुःख को महसूस करती है। प्राचार्या का मानना है कि परमात्मा तक पहुंचने में नर सेवा एक सशक्त माध्यम है।
हमारे धामिर्क ग्रंथों में भी इसका उल्लेख है कि नर सेवा ही नारायण सेवा है।

इसी सोच को ध्यान में रखते हुए छात्र अपने घर व परिचितों से एक मुट्ठी अनाज जरूरतमंदों की सहायर्ताथ एकत्र करते हैं। इसके बाद इस अनाज को छात्रों के माध्यम से ही किसी अनाथ आश्रम में दान करवाया जाता है। छात्र जब दान करने के लिए आश्रम जाते है तो उन्हें वहां रह रहे लोगों से परिचय करना, उनके जीवन अनुभव पूछना, स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेना और एक्यूप्रेसर के लाभ इसके प्रयोग की विधि बताने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। आश्रम में जाने के लिए हर बार नए छात्रों का चयन किया जाता है ताकि साल भर में अधिक से अधिक छात्रों को यहां जाने का अवसर मिल सके।

हाल ही में मुनि स्कूल के छात्र अपने द्वारा एकत्र किए गए अनाज को लेकर नजफ़गढ़ स्थित प्रेम-धाम आश्रम (ROYAL PLACE) में रह वृद्ध लोगों के बीच पहुंचे और उनसे मुलाकात की।
प्रार्चाया के अनुसार स्कूली छात्रों को अपने घर के आस-पास के आधे कि.मी. के दायरे में बीमार लोगों को एक्यूप्रेसर के लाभ बताना, दवाई का कम प्रयोग करते हुए घरेलू नुस्खों से बीमारीयों को दूर करना, समाज में पशु-पक्षियों के जीवन संरक्षण के बारे में जन-जागरण करना, पर्यावरण बाचाने, बिजली उपकरणों के उचित इस्तेमाल, प्रकृतिक चिकित्सा से उपचार के लिए भी समाज में आम जनता को जागरूक करने की जिम्मेदारी छात्रों को दी जाती है। इसके बाद स्कूल छात्रों के समाजिक कार्यों का समय-समय पर फीडबैक लेकर बेहतर कार्य करने वाले छात्रों को प्रोत्साहित भी करता है।

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